Hindi Poetry · independence · nation · Uncategorized

सरहदों को बाँधकर।
इंसानियत का गला दबाकर।
शाम को संतरी रंग का दुपट्टा ओढकर नारे लगाना।
क्या यही आज़ादी है?

पैसे को भगवान मानकर।
जाति के नाम पर हिंसा करकर।
शाम को भारत माँ को पूजना।
क्या यही आज़ादी है?

किसान की मजबूरी का फायदा उठाकर।
आक्सीज़न खत्म होने जैसे बेहुदा बहाने बनाकर।
शाम को टीवी पर बयान-बाजी करना।
क्या  यही आज़ादी है?

“आज़ादी” तो कटघरे में खड़ी है।
सवालों से जूझ रही है।
“आज़ादी” को अपनी “आज़ादी ” की तलाश है।

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Sangharsh…nai aasma k lie

Hwaon  k sath rishta thaa to mera

Is ajnabii shehar n vo bhi churaa liya
Daaltii thi daana  jin panchio ko
Aaj us udte panchi ne mujhe bhula dia
Kaagj aur kiitab m the panne sunehre
Unki taklifo ne mujhe rula dia
Choda tha gaon maine jinke bharose
Unki umeedo ne aaj phir mujhe utha dia
  Vo ubaasiyon ki aanch
Vo takleefo ki chaadr
  Vo shoor ki gunj
Aur chuppi ka aadt
Chamkti plke
     Aur kadmo ki aaht
Bs inkii yadon ne
   Mujhe sulaa diaa……..
  

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अभी उड़ना है मुझे 

 अभी उड़ना है मुझे

 अपनी ख्वाइशों को लेकर।
 अभी बढ़ना है मुझे
 अपने रंगों को लेकर
 माना कि मेरे बढ़े होने से
 जिम्मेदारी बढ़ रही है।
 पर होंसलें और साहस
 को कैसे भूल जाऊँ।
 बचपन मैं किया खुदसे वादा
 कैसे भूल जाऊँ।
                  सिमरन मनोचा 

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                 मेरे गुनाह, मेरी  हस्ती हैं 
बदल रही थी तस्वीर,  कुछ बदलते अरमानों के साथ
इच्छाओं का बोझ ही तो था,जीने का राज़।
चाहत और उम्मीदों का बादल घना था,
अब तो इसके नीचे डूबने का गुनाह मैंने कर लिया था।
चल पड़ा था रास्ते पर,शोहरत कमाने को
चकाचौंध तो मिल गई, बदले में मेरा ईमान उद्धार पर ले गई।
सूरज से अब मुलाकात नहीं होती,
 चाँद से भी  ज्यादा बात नहीं होती ।
गुनाहों से दोस्ती हो गई है, गहरी
अब तो उनसे भी धौके की बात नहीं होती ।

                          सिमरन मनोचा
      

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ज़िंदगी 

हमारे थे ही कब, जो हमारे साथ रहेंगे।
ये तो ख्यालों का खेल है,
जो बस यादों से बात करेंगे।
आखिर कब तक उम्मीदो से घोंसला बनाओगे,
हकीकत की दहलीज़ पर फिर खुद को पाओगे।
घड़ी की सुई कभी नहीं रुकेगी,
आहिसता चलने से उलझे
खुदबखुद नहीं सुलझेगीं।
मायुस होना भी सुझाव नहीं है।
इस नन्ही सी जिंदगी को जंग मानना भी
सही भावना नहीं है।
बस इस सफर से ही मोहब्बत कर लो,
ज्यादा नहीं तो तजुर्बों से अपनी जेबें भरलो।

                         सिमरन मनोचा